Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.124.45: महाराज! वरदान देकर जब ब्राह्मण चला गया, तो प्रह्लाद बहुत चिंतित हो गया। वह सोचने लगा - क्या करूँ? परन्तु वह किसी निर्णय पर नहीं पहुँच सका। | mahabharat अध्याय 12.124: इन्द्र और प्रह्लादकी कथा—शीलका प्रभाव, शीलके अभावमें धर्म, सत्य, सदाचार, बल और लक्ष्मीके न रहनेका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दत्ते वरे गते विप्रे चिन्ताऽऽसीन्महती तदा।
प्रह्रादस्य महाराज निश्चयं न च जग्मिवान्॥ ४५॥
अनुवाद
महाराज! वरदान देकर जब ब्राह्मण चला गया, तो प्रह्लाद बहुत चिंतित हो गया। वह सोचने लगा - क्या करूँ? परन्तु वह किसी निर्णय पर नहीं पहुँच सका।
Maharaj! After giving the boon, when the Brahmin left, Prahlad became very worried. He started thinking - what should he do? But he could not reach any decision. 45.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥