Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.124.42: ब्राह्मण बोला, "हे राजन! यदि आप प्रसन्न हैं और मुझे प्रसन्न करना चाहते हैं, तो मैं आपका सतीत्व प्राप्त करना चाहता हूँ; यही मेरा वरदान है।"   |   mahabharat अध्याय 12.124: इन्द्र और प्रह्लादकी कथा—शीलका प्रभाव, शीलके अभावमें धर्म, सत्य, सदाचार, बल और लक्ष्मीके न रहनेका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 124: इन्द्र और प्रह्लादकी कथा—शीलका प्रभाव, शीलके अभावमें धर्म, सत्य, सदाचार, बल और लक्ष्मीके न रहनेका वर्णन  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  12.124.42 
ब्राह्मण उवाच
यदि राजन् प्रसन्नस्त्वं मम चेदिच्छसि प्रियम्।
भवत: शीलमिच्छामि प्राप्तुमेष वरो मम॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण बोला, "हे राजन! यदि आप प्रसन्न हैं और मुझे प्रसन्न करना चाहते हैं, तो मैं आपका सतीत्व प्राप्त करना चाहता हूँ; यही मेरा वरदान है।"
 
The Brahmin said, "O King! If you are pleased and want to please me, then I wish to obtain your chastity; this is my boon." 42.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)