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mahabharat 12.124.39: यही एकमात्र लाभ है, ऐसा प्रह्लाद ने उस ब्रह्मवादी ब्राह्मण से कहा। इसके बाद भी जब उसने उसकी सेवा की, तब राक्षसराज ने उससे यह कहा-॥39॥   |   mahabharat अध्याय 12.124: इन्द्र और प्रह्लादकी कथा—शीलका प्रभाव, शीलके अभावमें धर्म, सत्य, सदाचार, बल और लक्ष्मीके न रहनेका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 124: इन्द्र और प्रह्लादकी कथा—शीलका प्रभाव, शीलके अभावमें धर्म, सत्य, सदाचार, बल और लक्ष्मीके न रहनेका वर्णन  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  12.124.39 
एतावच्छ्रेय इत्याह प्रह्रादो ब्रह्मवादिनम्।
शुश्रूषितस्तेन तदा दैत्येन्द्रो वाक्यमब्रवीत्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
यही एकमात्र लाभ है, ऐसा प्रह्लाद ने उस ब्रह्मवादी ब्राह्मण से कहा। इसके बाद भी जब उसने उसकी सेवा की, तब राक्षसराज ने उससे यह कहा-॥39॥
 
This is the only benefit, Prahlada said this to that Brahmavaadi Brahmin. Even after this, when he served him, the demon king said this to him -॥ 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)