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mahabharat 12.124.30: यह सुनकर ब्राह्मण बोला, 'हे राजन! जब भी अवसर मिले, मैं आपसे उत्तम धर्म का उपदेश ग्रहण करना चाहूँगा।' ॥30॥   |   mahabharat अध्याय 12.124: इन्द्र और प्रह्लादकी कथा—शीलका प्रभाव, शीलके अभावमें धर्म, सत्य, सदाचार, बल और लक्ष्मीके न रहनेका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.124.30 
ब्राह्मणस्त्वब्रवीद्‍‍‍राजन् यस्मिन् काले क्षणो भवेत्।
तदोपादेष्टुमिच्छामि यदाचर्यमनुत्तमम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर ब्राह्मण बोला, 'हे राजन! जब भी अवसर मिले, मैं आपसे उत्तम धर्म का उपदेश ग्रहण करना चाहूँगा।' ॥30॥
 
Hearing this the Brahmin said, 'O King! Whenever you get the opportunity I would like to receive from you the teachings of the best form of Dharma.' ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)