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श्लोक  12.124.3 
कथं तत् प्राप्यते शीलं श्रोतुमिच्छामि भारत।
किंलक्षणं च तत् प्रोक्तं ब्रूहि मे वदतां वर॥ ३॥
 
 
अनुवाद
भरत! वह शील कैसे प्राप्त होता है? इसे सुनने की मेरी बड़ी इच्छा है। हे वक्ताओं में पितामह! उसके लक्षण क्या हैं? मुझे यह बताइए।
 
Bharata! How is that morality attained? I have a great desire to hear this. O great grandfather among speakers! What are its characteristics? Tell me this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)