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mahabharat 12.124.26: जब महर्षि भार्गव ने उन्हें उपदेश दिया, तब इन्द्र ने पुनः शुक्राचार्य से पूछा - "क्या इससे भी बड़ा कोई लाभ है?"॥26॥   |   mahabharat अध्याय 12.124: इन्द्र और प्रह्लादकी कथा—शीलका प्रभाव, शीलके अभावमें धर्म, सत्य, सदाचार, बल और लक्ष्मीके न रहनेका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.124.26 
तेनापि समनुज्ञातो भार्गवेण महात्मना।
श्रेयोऽस्तीति पुनर्भूय: शुक्रमाह शतक्रतु:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
जब महर्षि भार्गव ने उन्हें उपदेश दिया, तब इन्द्र ने पुनः शुक्राचार्य से पूछा - "क्या इससे भी बड़ा कोई लाभ है?"॥26॥
 
When the great sage Bhaargava had given him the advice, Indra once again asked Shukracharya, “Is there any greater benefit than this?”॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)