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mahabharat 12.124.23: तत्पश्चात् बृहस्पति ने कहा कि यही एकमात्र कल्याणकारी उपाय है। तब इन्द्र ने पुनः पूछा- 'इससे ​​भी अधिक विशेष क्या है?'॥23॥   |   mahabharat अध्याय 12.124: इन्द्र और प्रह्लादकी कथा—शीलका प्रभाव, शीलके अभावमें धर्म, सत्य, सदाचार, बल और लक्ष्मीके न रहनेका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 124: इन्द्र और प्रह्लादकी कथा—शीलका प्रभाव, शीलके अभावमें धर्म, सत्य, सदाचार, बल और लक्ष्मीके न रहनेका वर्णन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  12.124.23 
एतावच्छ्रेय इत्येव बृहस्पतिरभाषत।
इन्द्रस्तु भूय: पप्रच्छ को विशेषो भवेदिति॥ २३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् बृहस्पति ने कहा कि यही एकमात्र कल्याणकारी उपाय है। तब इन्द्र ने पुनः पूछा- 'इससे ​​भी अधिक विशेष क्या है?'॥23॥
 
After that Brihaspati said that this is the only good (measure for welfare). Then Indra asked again- 'What is more special than this?'॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)