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mahabharat 12.124.22: हे कुरुश्रेष्ठ! तब भगवान बृहस्पति ने देवेन्द्र को हितकर परम ज्ञान का उपदेश किया॥22॥   |   mahabharat अध्याय 12.124: इन्द्र और प्रह्लादकी कथा—शीलका प्रभाव, शीलके अभावमें धर्म, सत्य, सदाचार, बल और लक्ष्मीके न रहनेका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.124.22 
ततो बृहस्पतिस्तस्मै ज्ञानं नै:श्रेयसं परम्।
कथयामास भगवान् देवेन्द्राय कुरूद्वह॥ २२॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुश्रेष्ठ! तब भगवान बृहस्पति ने देवेन्द्र को हितकर परम ज्ञान का उपदेश किया॥22॥
 
Kurushrestha! Then Lord Brihaspati preached the supreme knowledge beneficial to Devendra. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)