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mahabharat 12.124.2: हे पुण्यात्माओं में श्रेष्ठ! यदि मैं उन्हें जान सकूँ, तो पुण्य की प्राप्ति का उपाय सुनना चाहूँगा।॥2॥   |   mahabharat अध्याय 12.124: इन्द्र और प्रह्लादकी कथा—शीलका प्रभाव, शीलके अभावमें धर्म, सत्य, सदाचार, बल और लक्ष्मीके न रहनेका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.124.2 
यदि तच्छक्यमस्माभिर्ज्ञातुं धर्मभृतां वर।
श्रोतुमिच्छामि तत् सर्वं यथैतदुपलभ्यते॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे पुण्यात्माओं में श्रेष्ठ! यदि मैं उन्हें जान सकूँ, तो पुण्य की प्राप्ति का उपाय सुनना चाहूँगा।॥2॥
 
The best of the virtuous! If I could know him, I would like to hear the way in which virtue is achieved. ॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)