Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.123.9: इसके अतिरिक्त कभी-कभी अन्य साधन भी धन प्राप्ति के लिए उपयोगी हो जाते हैं और कभी-कभी धन प्राप्ति कराने वाले कर्म भी गलत फल देते हैं। कभी-कभी धन पाकर भी मनुष्य अनिष्ट कार्यों में प्रवृत्त हो जाता है और धन के अतिरिक्त अन्य साधन धर्म में सहायक हो जाते हैं। अतः मूर्ख मनुष्य अपनी अज्ञानमयी हीन बुद्धि से मोहित होकर इस मान्यता पर विश्वास नहीं करता कि धन धर्म से होता है और धर्म धन से होता है, अतः उसे दोनों का फल नहीं मिलता।॥9॥ | mahabharat अध्याय 12.123: त्रिवर्गका विचार तथा पापके कारण पदच्युत हुए राजाके पुनरुत्थानके विषयमें आंगरिष्ठ और कामन्दकका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अर्थार्थमन्यद् भवति विपरीतमथापरम्।
अनर्थार्थमवाप्यार्थमन्यत्राद्योपकारकम्।
बुद्धॺाबुद्धिरिहार्थे न तदज्ञाननिकृष्टया॥ ९॥
अनुवाद
इसके अतिरिक्त कभी-कभी अन्य साधन भी धन प्राप्ति के लिए उपयोगी हो जाते हैं और कभी-कभी धन प्राप्ति कराने वाले कर्म भी गलत फल देते हैं। कभी-कभी धन पाकर भी मनुष्य अनिष्ट कार्यों में प्रवृत्त हो जाता है और धन के अतिरिक्त अन्य साधन धर्म में सहायक हो जाते हैं। अतः मूर्ख मनुष्य अपनी अज्ञानमयी हीन बुद्धि से मोहित होकर इस मान्यता पर विश्वास नहीं करता कि धन धर्म से होता है और धर्म धन से होता है, अतः उसे दोनों का फल नहीं मिलता।॥9॥
Apart from this, sometimes other means also become useful for attaining wealth and sometimes the work that leads to attaining wealth also gives wrong results. Sometimes, even after getting wealth, a man gets involved in harmful works and other means other than wealth become helpful in religion. Therefore, the foolish man, deluded by his ignorant inferior intellect, does not believe in the belief that wealth comes from religion and religion comes from wealth, and therefore, he does not get the fruits of both.॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥