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mahabharat 12.123.6: धर्म से शरीर की रक्षा होती है, धर्म की प्राप्ति के लिए धन की आवश्यकता होती है और काम का परिणाम कामवासना है। ये सब रजोगुण हैं ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 12.123: त्रिवर्गका विचार तथा पापके कारण पदच्युत हुए राजाके पुनरुत्थानके विषयमें आंगरिष्ठ और कामन्दकका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.123.6 
धर्माच्छरीरसंगुप्तिर्धर्मार्थं चार्थ उच्यते।
कामो रतिफलश्चात्र सर्वे ते च रजस्वला:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
धर्म से शरीर की रक्षा होती है, धर्म की प्राप्ति के लिए धन की आवश्यकता होती है और काम का परिणाम कामवासना है। ये सब रजोगुण हैं ॥6॥
 
The body is protected by Dharma, wealth is required for the attainment of Dharma and the result of Kama is sexual desire. All of them are Rajoguna. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)