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mahabharat 12.123.15: कामन्दकने कहा - राजन् ! जो मनुष्य धर्म और धन का त्याग करके केवल काम का सेवन करता है, उसकी बुद्धि दोनों के त्याग से नष्ट हो जाती है ॥15॥   |   mahabharat अध्याय 12.123: त्रिवर्गका विचार तथा पापके कारण पदच्युत हुए राजाके पुनरुत्थानके विषयमें आंगरिष्ठ और कामन्दकका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.123.15 
कामन्दक उवाच
यो धर्मार्थौ परित्यज्य काममेवानुवर्तते।
स धर्मार्थपरित्यागात् प्रज्ञानाशमिहार्च्छति॥ १५॥
 
 
अनुवाद
कामन्दकने कहा - राजन् ! जो मनुष्य धर्म और धन का त्याग करके केवल काम का सेवन करता है, उसकी बुद्धि दोनों के त्याग से नष्ट हो जाती है ॥15॥
 
Kamandakane said – King! One who abandons religion and wealth and consumes only lust, his intellect is destroyed by the renunciation of both. 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)