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श्लोक  12.123.1 
युधिष्ठिर उवाच
तात धर्मार्थकामानां श्रोतुमिच्छामि निश्चयम्।
लोकयात्रा हि कात्‍स्‍न्‍‍‍र्येन तिष्ठेत् केषु प्रतिष्ठिता॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा- पितामह! मैं धर्म, अर्थ और काम के विषय में आपकी निश्चित राय सुनना चाहता हूँ। जीवन-यात्रा पूरी करने के लिए किसका अवलम्बन लेना चाहिए?॥1॥
 
Yudhishthira asked- Father! I want to hear your definite opinion regarding Dharma, Artha and Kama. On which one should one depend to complete the journey of life?॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)