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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 122: दण्डकी उत्पत्ति तथा उसके क्षत्रियोंके हाथमें आनेकी परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.122.9 
सद्भिराचरितं पूर्वं यथावदनुयायिनम्।
अपृच्छद् वसुहोमस्तं राजन् किं करवाणि ते॥ ९॥
 
 
अनुवाद
वसुहोम ने मान्धाता से, जो पूर्वकाल में ऋषियों द्वारा अनुसरण किये गये मार्ग पर चल रहा था, पूछा, "हे राजन, मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूँ?"
 
Vasuhoma asked Mandhaata, who was continuing on the path followed by the sages in the past, "O King, what service can I render to you?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)