Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.122.56: नरश्रेष्ठ! भरतनन्दन! सम्पूर्ण धर्मजगत को मर्यादा में रखने वाले दण्ड के सम्बन्ध में मैंने तुम्हें सब बातें बता दी हैं ॥56॥ | mahabharat अध्याय 12.122: दण्डकी उत्पत्ति तथा उसके क्षत्रियोंके हाथमें आनेकी परम्पराका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इति ते सर्वमाख्यातं यो दण्डो मनुजर्षभ।
नियन्ता सर्वलोकस्य धर्माक्रान्तस्य भारत॥ ५६॥
अनुवाद
नरश्रेष्ठ! भरतनन्दन! सम्पूर्ण धर्मजगत को मर्यादा में रखने वाले दण्ड के सम्बन्ध में मैंने तुम्हें सब बातें बता दी हैं ॥56॥
Narashrestha! Bharatnandan! I have told you all the things regarding the punishment which will keep the entire religious world within the rules. 56॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि दण्डोत्पत्युपाख्याने द्वाविंशत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १२२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें दण्डकी उत्पत्तिकी कथाविषयक एक सौ बाईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १२२॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥