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mahabharat 12.122.5: वहाँ वे वेदों में वर्णित अनेक गुणों से संपन्न होकर तपस्या करने लगे। उस तपस्या के प्रभाव से वे देवताओं के समान हो गए। ब्राह्मणों में उनका बड़ा सम्मान होने लगा। 5॥   |   mahabharat अध्याय 12.122: दण्डकी उत्पत्ति तथा उसके क्षत्रियोंके हाथमें आनेकी परम्पराका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 122: दण्डकी उत्पत्ति तथा उसके क्षत्रियोंके हाथमें आनेकी परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.122.5 
स तत्र बहुभिर्युक्तस्तदा श्रुतिमयैर्गुणै:।
ब्राह्मणानामनुमतो देवर्षिसदृशोऽभवत्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
वहाँ वे वेदों में वर्णित अनेक गुणों से संपन्न होकर तपस्या करने लगे। उस तपस्या के प्रभाव से वे देवताओं के समान हो गए। ब्राह्मणों में उनका बड़ा सम्मान होने लगा। 5॥
 
There he became endowed with many virtues mentioned in the Vedas and started doing penance. Due to the effect of that penance, they became like gods. He started getting great respect among the Brahmins. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)