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mahabharat 12.122.36: तदनन्तर जब ब्रह्माजी का यज्ञ विधिपूर्वक पूर्ण हो गया, तब महादेवजी ने धर्मरक्षक भगवान विष्णु का सत्कार करके उन्हें दण्ड प्रदान किया॥36॥   |   mahabharat अध्याय 12.122: दण्डकी उत्पत्ति तथा उसके क्षत्रियोंके हाथमें आनेकी परम्पराका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 122: दण्डकी उत्पत्ति तथा उसके क्षत्रियोंके हाथमें आनेकी परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  12.122.36 
महादेवस्ततस्तस्मिन् वृत्ते यज्ञे यथाविधि।
दण्डं धर्मस्य गोप्तारं विष्णवे सत्कृतं ददौ॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर जब ब्रह्माजी का यज्ञ विधिपूर्वक पूर्ण हो गया, तब महादेवजी ने धर्मरक्षक भगवान विष्णु का सत्कार करके उन्हें दण्ड प्रदान किया॥36॥
 
Thereafter, when the yagya of Brahmaji was completed in a proper manner, then Mahadevji honored the protector of religion Lord Vishnu and offered him the punishment. 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)