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mahabharat 12.122.33: जिनका स्वरूप संहार और शील (उत्पादन) है, उन परमेश्वर ने काल को मृत्यु, सुख और दुःख इन चार प्रकार का स्वामी बनाया ॥33॥   |   mahabharat अध्याय 12.122: दण्डकी उत्पत्ति तथा उसके क्षत्रियोंके हाथमें आनेकी परम्पराका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 122: दण्डकी उत्पत्ति तथा उसके क्षत्रियोंके हाथमें आनेकी परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  12.122.33 
कालं सर्वेशमकरोत् संहारविनयात्मकम्।
मृत्योश्चतुर्विभागस्य दु:खस्य च सुखस्य च॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
जिनका स्वरूप संहार और शील (उत्पादन) है, उन परमेश्वर ने काल को मृत्यु, सुख और दुःख इन चार प्रकार का स्वामी बनाया ॥33॥
 
Whose form is destruction and modesty (production), that Supreme God made Kaal the master of four types of death, happiness and sorrow. 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)