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mahabharat 12.122.30: विशाल नेत्रों वाले सनातन महात्मा महादेवजी ने स्वयं को रुद्रों का परम देवता और शक्तिशाली रक्षक बना लिया ॥30॥   |   mahabharat अध्याय 12.122: दण्डकी उत्पत्ति तथा उसके क्षत्रियोंके हाथमें आनेकी परम्पराका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 122: दण्डकी उत्पत्ति तथा उसके क्षत्रियोंके हाथमें आनेकी परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  12.122.30 
रुद्राणामपि चेशानं गोप्तारं विदधे प्रभुम्।
महात्मानं महादेवं विशालाक्षं सनातनम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
विशाल नेत्रों वाले सनातन महात्मा महादेवजी ने स्वयं को रुद्रों का परम देवता और शक्तिशाली रक्षक बना लिया ॥30॥
 
The eternal Mahatma Mahadevji with huge eyes made himself the supreme god and powerful protector of the Rudras. 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)