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mahabharat 12.122.21: जैसे कुत्ते मांस के टुकड़े के लिए एक-दूसरे से लड़ते और नोचते हैं, वैसे ही मनुष्य भी एक-दूसरे को लूटने लगे। बलवान मनुष्य दुर्बलों को मारने लगे। सर्वत्र अराजकता फैल गई॥21॥   |   mahabharat अध्याय 12.122: दण्डकी उत्पत्ति तथा उसके क्षत्रियोंके हाथमें आनेकी परम्पराका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 122: दण्डकी उत्पत्ति तथा उसके क्षत्रियोंके हाथमें आनेकी परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  12.122.21 
परस्परं विलुम्पन्ति सारमेया यथामिषम्।
अबलान् बलिनो घ्नन्ति निर्मर्यादमवर्तत॥ २१॥
 
 
अनुवाद
जैसे कुत्ते मांस के टुकड़े के लिए एक-दूसरे से लड़ते और नोचते हैं, वैसे ही मनुष्य भी एक-दूसरे को लूटने लगे। बलवान मनुष्य दुर्बलों को मारने लगे। सर्वत्र अराजकता फैल गई॥21॥
 
Just like dogs fight and tear each other for a piece of meat, similarly humans also started looting each other. Strong men started killing the weak. Chaos spread everywhere.॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)