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mahabharat 12.122.16: फिर उन्होंने कई वर्षों तक एक गर्भस्थ शिशु को अपने सिर पर धारण किया। जब एक हजार वर्ष बीत गए, तो ब्रह्माजी को छींक आई और वह गर्भस्थ शिशु नीचे गिर गया।   |   mahabharat अध्याय 12.122: दण्डकी उत्पत्ति तथा उसके क्षत्रियोंके हाथमें आनेकी परम्पराका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 122: दण्डकी उत्पत्ति तथा उसके क्षत्रियोंके हाथमें आनेकी परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.122.16 
स गर्भं शिरसा देवो बहुवर्षाण्यधारयत्।
पूर्णे वर्षसहस्रे तु स गर्भ: क्षुवतोऽपतत्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
फिर उन्होंने कई वर्षों तक एक गर्भस्थ शिशु को अपने सिर पर धारण किया। जब एक हजार वर्ष बीत गए, तो ब्रह्माजी को छींक आई और वह गर्भस्थ शिशु नीचे गिर गया।
 
Then he carried a fetus on his head for many years. When a thousand years passed, Brahmaji sneezed and the fetus fell down.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)