Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.121.60: राजा को उन सभी को दण्ड देना चाहिए जो अपने धर्म पर अडिग रहते हैं, चाहे वह माता हो, पिता हो, भाई हो, पत्नी हो या पुरोहित हो। राजा के लिए कोई भी दण्ड से रहित नहीं है।' | mahabharat अध्याय 12.121: दण्डके स्वरूप, नाम, लक्षण, प्रभाव और प्रयोगका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
माता पिता च भ्राता च भार्या चैव पुरोहित:।
नादण्डॺो विद्यते राज्ञो य: स्वधर्मे न तिष्ठति॥ ६०॥
अनुवाद
राजा को उन सभी को दण्ड देना चाहिए जो अपने धर्म पर अडिग रहते हैं, चाहे वह माता हो, पिता हो, भाई हो, पत्नी हो या पुरोहित हो। राजा के लिए कोई भी दण्ड से रहित नहीं है।'
'The king must punish anyone who does not remain steadfast in his religion, be it mother, father, brother, wife or priest. No one is unpunishable for the king.'
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि दण्डस्वरूपाधिकथने एकविंशत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १२१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें दण्डके स्वरूपका वर्णनविषयक एक सौ इक्कीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १२१॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥