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mahabharat 12.121.6: वह समस्त प्राणियों पर शासन करने के लिए कैसे जागृत और सजग रहता है? इस जगत को समस्त बुराइयों से बचाने के लिए कौन जागृत रहता है?॥6॥   |   mahabharat अध्याय 12.121: दण्डके स्वरूप, नाम, लक्षण, प्रभाव और प्रयोगका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 121: दण्डके स्वरूप, नाम, लक्षण, प्रभाव और प्रयोगका वर्णन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.121.6 
जागर्ति च कथं दण्ड: प्रजास्ववहितात्मक:।
कश्च पूर्वापरमिदं जागर्ति प्रतिपालयन्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
वह समस्त प्राणियों पर शासन करने के लिए कैसे जागृत और सजग रहता है? इस जगत को समस्त बुराइयों से बचाने के लिए कौन जागृत रहता है?॥6॥
 
How does he remain vigilant and awake to rule over all beings? Who remains awake to protect this universe from all evils?॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)