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mahabharat 12.121.54: वेदों के माध्यम से जो प्रकट किया गया है, उसका स्वरूप ही धर्म है। जो धर्म है, वह अपने लाभ को प्रकट करता है। पुण्यात्मा पुरुषों ने धर्म के अनुसार धार्मिक मान्यताओं के आधार पर दण्ड का विधान किया है। 54।   |   mahabharat अध्याय 12.121: दण्डके स्वरूप, नाम, लक्षण, प्रभाव और प्रयोगका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 121: दण्डके स्वरूप, नाम, लक्षण, प्रभाव और प्रयोगका वर्णन  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  12.121.54 
यश्च वेदप्रसूतात्मा स धर्मो गुणदर्शन:।
धर्मप्रत्यय उद्दिष्टो यथाधर्मं कृतात्मभि:॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
वेदों के माध्यम से जो प्रकट किया गया है, उसका स्वरूप ही धर्म है। जो धर्म है, वह अपने लाभ को प्रकट करता है। पुण्यात्मा पुरुषों ने धर्म के अनुसार धार्मिक मान्यताओं के आधार पर दण्ड का विधान किया है। 54।
 
The form of that which is revealed through the Vedas is Dharma. Whatever is Dharma, it shows its benefits. Virtuous men have propounded punishment based on religious beliefs in accordance with Dharma. 54.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)