Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.121.50: गुरु या विचारक की मान्यता के अनुसार जो व्यवहार उत्पन्न होता है, वह (वादी और प्रतिवादी के बीच उठे विवाद से उत्पन्न व्यवहार से) भिन्न होता है। उसके कारण जो दण्ड दिया जाता है, उसे 'भर्तृप्रत्यलक्षण' कहते हैं। वह सम्पूर्ण जगत् के लिए कल्याणकारी देखा गया है (यह प्रथम प्रकार है)। ॥50॥ | mahabharat अध्याय 12.121: दण्डके स्वरूप, नाम, लक्षण, प्रभाव और प्रयोगका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भर्तृप्रत्यय उत्पन्नो व्यवहारस्तथापर:।
तस्माद् य: स हितो दृष्टो भर्तृप्रत्ययलक्षण:॥ ५०॥
अनुवाद
गुरु या विचारक की मान्यता के अनुसार जो व्यवहार उत्पन्न होता है, वह (वादी और प्रतिवादी के बीच उठे विवाद से उत्पन्न व्यवहार से) भिन्न होता है। उसके कारण जो दण्ड दिया जाता है, उसे 'भर्तृप्रत्यलक्षण' कहते हैं। वह सम्पूर्ण जगत् के लिए कल्याणकारी देखा गया है (यह प्रथम प्रकार है)। ॥50॥
The behaviour that arises according to the belief of the master or the thinker is different (than the behaviour that arises from the dispute raised by the plaintiff and the defendant). The punishment given due to it is called 'Bhartrpratyalakshana'. It has been seen to be beneficial for the entire world (this is the first type). ॥ 50॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥