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mahabharat 12.121.45-47: अथवा सम्मिलित अंग - सारथी, हाथीसवार, घुड़सवार, पैदल सैनिक, मंत्री, वैद्य, भिक्षुक, वकील, ज्योतिषी, ज्योतिषी, कोष, मित्र, धान्य तथा अन्य समस्त पदार्थ, राज्य की सात प्रकृतियाँ (स्वामी, मंत्री, मित्र, कोष, राष्ट्र, दुर्ग और सेना) तथा उपर्युक्त आठ अंगों से सम्मिलित बल - ये सब राज्य का शरीर माने गए हैं। इन सबमें दण्ड ही प्रधान अंग है, क्योंकि दण्ड ही सबकी उत्पत्ति का कारण है ॥45-47॥   |   mahabharat अध्याय 12.121: दण्डके स्वरूप, नाम, लक्षण, प्रभाव और प्रयोगका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 121: दण्डके स्वरूप, नाम, लक्षण, प्रभाव और प्रयोगका वर्णन  »  श्लोक 45-47
 
 
श्लोक  12.121.45-47 
अथवाङ्गस्य युक्तस्य रथिनो हस्तियायिन:।
अश्वारोहा: पदाताश्च मन्त्रिणो रसदाश्च ये॥ ४५॥
भिक्षुका: प्राड्‍‍विवाकाश्च मौहूर्ता दैवचिन्तका:।
कोशो मित्राणि धान्यं च सर्वोपकरणानि च॥ ४६॥
सप्तप्रकृति चाष्टाङ्गं शरीरमिह यद् विदु:।
राज्यस्य दण्डमेवाङ्गं दण्ड: प्रभव एव च॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
अथवा सम्मिलित अंग - सारथी, हाथीसवार, घुड़सवार, पैदल सैनिक, मंत्री, वैद्य, भिक्षुक, वकील, ज्योतिषी, ज्योतिषी, कोष, मित्र, धान्य तथा अन्य समस्त पदार्थ, राज्य की सात प्रकृतियाँ (स्वामी, मंत्री, मित्र, कोष, राष्ट्र, दुर्ग और सेना) तथा उपर्युक्त आठ अंगों से सम्मिलित बल - ये सब राज्य का शरीर माने गए हैं। इन सबमें दण्ड ही प्रधान अंग है, क्योंकि दण्ड ही सबकी उत्पत्ति का कारण है ॥45-47॥
 
Or the combined parts - charioteers, elephant riders, horse riders, foot soldiers, ministers, physicians, mendicants, lawyers, astrologers, diviners, treasuries, friends, grains and all other materials, the seven natures of the state (master, minister, friend, treasury, nation, fort and army) and the force combined with the above mentioned eight parts - all these are considered to be the body of the state. Among all these, punishment is the main part, because punishment is the cause of the origin of all. ॥ 45-47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)