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mahabharat 12.121.42: जो राजा सदैव सैन्यबल से सुसज्जित रहता है और जो धर्म, आचरण, दण्ड, देव और जीव रूपी पाँच रूपों को धारण करता है, उसे स्वयं भगवान ने दण्डनीति और अपना धन प्रदान किया है ॥ 42॥   |   mahabharat अध्याय 12.121: दण्डके स्वरूप, नाम, लक्षण, प्रभाव और प्रयोगका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 121: दण्डके स्वरूप, नाम, लक्षण, प्रभाव और प्रयोगका वर्णन  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  12.121.42 
अददद् दण्डमेवास्मै धृतमैश्वर्यमेव च।
बलेन यश्च संयुक्त: सदा पञ्चविधात्मक:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
जो राजा सदैव सैन्यबल से सुसज्जित रहता है और जो धर्म, आचरण, दण्ड, देव और जीव रूपी पाँच रूपों को धारण करता है, उसे स्वयं भगवान ने दण्डनीति और अपना धन प्रदान किया है ॥ 42॥
 
To the king who is always equipped with military power and who adopts five forms in the form of religion, behaviour, punishment, God and living being, God himself has bestowed the policy of punishment and his own wealth. ॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)