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mahabharat 12.121.34: युधिष्ठिर! यदि संसार में दण्ड की व्यवस्था न होती, तो सभी लोग एक-दूसरे का नाश कर देते। दण्ड के भय से ही लोग आपस में लड़ते नहीं हैं। 34॥   |   mahabharat अध्याय 12.121: दण्डके स्वरूप, नाम, लक्षण, प्रभाव और प्रयोगका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 121: दण्डके स्वरूप, नाम, लक्षण, प्रभाव और प्रयोगका वर्णन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  12.121.34 
न स्याद् यदीह दण्डो वै प्रमथेयु: परस्परम्।
भयाद् दण्डस्य नान्योन्यं घ्नन्ति चैव युधिष्ठिर॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! यदि संसार में दण्ड की व्यवस्था न होती, तो सभी लोग एक-दूसरे का नाश कर देते। दण्ड के भय से ही लोग आपस में लड़ते नहीं हैं। 34॥
 
Yudhisthira! If there was no system of punishment in the world, everyone would have destroyed each other. It is only because of the fear of punishment that people do not fight among themselves. 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)