Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.121.2-3: हे प्रभु! सर्वव्यापी एवं शक्तिशाली दण्ड ही देवता, ऋषि, पितर, महात्मा, यक्ष, राक्षस, पिशाच, साध्यगण तथा पशु-पक्षी रूप में रहने वाले संसार के सभी प्राणियों के कल्याण का साधन है। | mahabharat अध्याय 12.121: दण्डके स्वरूप, नाम, लक्षण, प्रभाव और प्रयोगका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
देवतानामृषीणां च पितॄणां च महात्मनाम्।
यक्षरक्ष:पिशाचानां साध्यानां च विशेषत:॥ २॥
सर्वेषां प्राणिनां लोके तिर्यग्योनिनिवासिनाम्।
सर्वव्यापी महातेजा दण्ड: श्रेयानिति प्रभो॥ ३॥
अनुवाद
हे प्रभु! सर्वव्यापी एवं शक्तिशाली दण्ड ही देवता, ऋषि, पितर, महात्मा, यक्ष, राक्षस, पिशाच, साध्यगण तथा पशु-पक्षी रूप में रहने वाले संसार के सभी प्राणियों के कल्याण का साधन है।
Lord! The omnipresent and powerful punishment is the means of welfare for all the creatures of the world living in the form of gods, sages, ancestors, Mahatmas, Yakshas, demons, vampires, Sadhyagans and animals and birds.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥