यस्मिन्नर्थे हितं यत् स्यात् तद्वर्णं रूपमादिशेत्।
बहुरूपस्य राज्ञो हि सूक्ष्मोऽप्यर्थो न सीदति॥ ६॥
अनुवाद
जो रूप किसी कार्य के लिए लाभदायक हो, उसे वही रूप धारण करना चाहिए (जैसे, अपराधी को दण्ड देते समय भयंकर रूप धारण करना चाहिए और दीन-दुखियों पर दया करते समय शान्त एवं करुणामय रूप धारण करना चाहिए) इस प्रकार जो राजा अनेक रूप धारण करता है, उसका छोटा-सा कार्य भी कभी नहीं बिगड़ता॥6॥
Whatever form is beneficial for a particular task, he should assume that form (for example, while punishing a criminal, he should assume a fierce form and while showing mercy to the poor, he should assume a calm and compassionate form). In this way, the king who assumes many forms, even his smallest task does not go wrong.॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥