श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 120: राजधर्मका साररूपमें वर्णन  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  12.120.48 
धनं भोगं पुत्रदारं समृद्धिं
सर्वं लुब्ध: प्रार्थयते परेषाम्।
लुब्धे दोषा: सम्भवन्तीह सर्वे
तस्माद् राजा न प्रगृह्णीत लुब्धम्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
लोभी मनुष्य दूसरों का धन, सुख, स्त्री, संतान और वैभव हड़पना चाहता है। लोभी व्यक्ति में सभी प्रकार के दोष प्रकट होते हैं; इसलिए राजा को चाहिए कि उसे अपने राज्य में कोई पद न दे। 48.
 
A greedy man wants to acquire others' wealth, pleasures, wife, children and prosperity. All kinds of faults are manifested in a greedy person; therefore the king should not give him any position in his kingdom. 48.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)