विद्या तपो वा विपुलं धनं वा
सर्वं ह्येतद् व्यवसायेन शक्यम्।
बुद्धॺायत्तं तन्निवसेद् देहवत्सु
तस्माद् विद्याद् व्यवसायं प्रभूतम्॥ ४५॥
अनुवाद
ज्ञान, तप और प्रचुर धन - ये सब परिश्रम से प्राप्त होते हैं । वह परिश्रम प्राणियों में बुद्धि पर निर्भर है; अतः सभी कार्यों की सिद्धि के लिए परिश्रम को ही पर्याप्त साधन समझना चाहिए ॥ 45॥
Knowledge, penance and abundant wealth - all these can be obtained through hard work. That hard work is dependent on the intellect in living beings; hence hard work should be considered as the sufficient means for the accomplishment of all tasks. ॥ 45॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥