श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 120: राजधर्मका साररूपमें वर्णन  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  12.120.44 
तस्माद् राजा प्रगृहीत: प्रजासु
मूलं लक्ष्म्या: सर्वशो ह्याददीत।
दीर्घं कालं ह्यपि सम्पीडॺमानो
विद्युत्सम्पातमपि वा नोर्जित: स्यात्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
अतः राजा को चाहिए कि वह अपनी प्रजा पर कृपालु होकर उनसे कर वसूल करे। वह अपनी प्रजा को बहुत समय तक कष्ट न दे और फिर उन पर बिजली की तरह प्रहार करके अपना प्रभाव न दिखाए ॥44॥
 
Therefore, the king should be gracious towards his subjects and collect taxes from them. He should not harass his subjects for a long time and then show his influence by striking them like lightning. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)