Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.120.37: धारणा शक्ति, चतुराई, संयम, बुद्धि, शरीर, धैर्य, पराक्रम तथा देश-काल की परिस्थितियों के प्रति असावधान न होना - ये आठ गुण कम या अधिक धन बढ़ाने के मुख्य साधन हैं, अर्थात् धनरूपी अग्नि को प्रज्वलित करने वाले ईंधन हैं ॥37॥ | mahabharat अध्याय 12.120: राजधर्मका साररूपमें वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धृतिर्दाक्ष्यं संयमो बुद्धिरात्मा
धैर्यं शौर्यं देशकालाप्रमाद:।
अल्पस्य वा बहुनो वा विवृद्धौ
धनस्यैतान्यष्ट समिन्धनानि॥ ३७॥
अनुवाद
धारणा शक्ति, चतुराई, संयम, बुद्धि, शरीर, धैर्य, पराक्रम तथा देश-काल की परिस्थितियों के प्रति असावधान न होना - ये आठ गुण कम या अधिक धन बढ़ाने के मुख्य साधन हैं, अर्थात् धनरूपी अग्नि को प्रज्वलित करने वाले ईंधन हैं ॥37॥
Perception power, cleverness, restraint, intelligence, body, patience, bravery and not being careless about the circumstances of time and place - these eight qualities are the main means of increasing more or less wealth, that is, they are the fuel to ignite the fire of wealth. 37॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥