Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.120.32: जैसे सूर्य प्रतिदिन उदय होकर अपनी किरणों से सम्पूर्ण जगत को प्रकाशित करता है, उसी प्रकार राजा को भी चाहिए कि वह सदैव अपनी दृष्टि से सम्पूर्ण राष्ट्र का निरीक्षण करे, राज्य का समाचार जानने के लिए बार-बार गुप्तचर भेजे तथा अपनी बुद्धि से भी सोच-विचारकर कार्य करे ॥32॥ | mahabharat अध्याय 12.120: राजधर्मका साररूपमें वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नित्यं राष्ट्रमवेक्षेत गोभि: सूर्य इवोदित:।
चरान् स्वनुचरान् विद्यात् तथा बुुद्धॺा स्वयं चरेत्॥ ३२॥
अनुवाद
जैसे सूर्य प्रतिदिन उदय होकर अपनी किरणों से सम्पूर्ण जगत को प्रकाशित करता है, उसी प्रकार राजा को भी चाहिए कि वह सदैव अपनी दृष्टि से सम्पूर्ण राष्ट्र का निरीक्षण करे, राज्य का समाचार जानने के लिए बार-बार गुप्तचर भेजे तथा अपनी बुद्धि से भी सोच-विचारकर कार्य करे ॥32॥
Just as the sun rises every day and illuminates the entire world with its rays, similarly the king should always observe the entire nation with his sight. He should send spies again and again to know the news of the kingdom and should also act after thinking and thinking with his own intellect. ॥ 32॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥