श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 120: राजधर्मका साररूपमें वर्णन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  12.120.31 
व्यक्तश्चानुग्रहो यस्य यथार्थश्चापि निग्रह:।
गुप्तात्मा गुप्तराष्ट्रश्च स राजा राजधर्मवित्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
जिसकी कृपा सब पर प्रत्यक्ष है और जिसका संयम (दण्ड) भी उचित कारण पर आधारित है, जो अपनी और अपने राज्य की रक्षा करता है, वही राजा राजधर्म को जानने वाला है ॥31॥
 
The one whose grace is evident to all and whose restraint (punishment) is also based on the right reason, who protects himself and his kingdom, that king is the one who knows the royal duty. ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)