Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.120.29: इस प्रकार राजा को सदैव सतर्क रहना चाहिए और राज्य के प्रत्येक कार्य का आरंभ और समापन सावधानी से करना चाहिए। उसे मन में संतोष रखना चाहिए और गुप्तचरों की सहायता से राष्ट्र के सभी मामलों की जानकारी रखनी चाहिए। | mahabharat अध्याय 12.120: राजधर्मका साररूपमें वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एतेन च प्रकारेण कृत्यानामागतिं गतिम्।
युक्त: समनुतिष्ठेत तुष्टश्चारैरुपस्कृत:॥ २९॥
अनुवाद
इस प्रकार राजा को सदैव सतर्क रहना चाहिए और राज्य के प्रत्येक कार्य का आरंभ और समापन सावधानी से करना चाहिए। उसे मन में संतोष रखना चाहिए और गुप्तचरों की सहायता से राष्ट्र के सभी मामलों की जानकारी रखनी चाहिए।
In this way the king should always be cautious and start and finish every work of the kingdom. He should be content in his mind and keep himself informed about all the matters of the nation with the help of spies.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥