Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.120.25: राजा को चाहिए कि वह सब से प्रेम करे, परन्तु धर्म में किसी प्रकार की बाधा न आने दे। जो राजा अपनी प्रजा को अपनी प्रिय समझता है, वह पर्वत के समान दृढ़ रहता है॥ 25॥ | mahabharat अध्याय 12.120: राजधर्मका साररूपमें वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धर्माणामविरोधेन सर्वेषां प्रियमाचरेत्।
ममायमिति राजा य: स पर्वत इवाचल:॥ २५॥
अनुवाद
राजा को चाहिए कि वह सब से प्रेम करे, परन्तु धर्म में किसी प्रकार की बाधा न आने दे। जो राजा अपनी प्रजा को अपनी प्रिय समझता है, वह पर्वत के समान दृढ़ रहता है॥ 25॥
A king should love everyone, but should not allow any hindrance in Dharma. A king who thinks that his subjects are his own favourites remains as steadfast as a mountain.॥ 25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥