स निकृष्टां कथां प्राज्ञो यदि बुद्धॺा बृहस्पति:।
स्वभावमेष्यते तप्तं कृष्णायसमिवोदके॥ २१॥
अनुवाद
यदि वह बुद्धिमान राजा बृहस्पति के समान बुद्धिमान होते हुए भी किसी कारण से नीच कोटि की बात कहे, तो जैसे गरम किया हुआ लोहा जल में डालने पर ठण्डा हो जाता है, वैसे ही उसे अपना शान्त स्वभाव स्वीकार कर लेना चाहिए ॥ 21॥
If that wise king, despite being as intelligent as Brihaspati, for some reason says something of a low order, then just like a heated iron cools down when put into water, he should accept his own calm nature. ॥ 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥