श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 120: राजधर्मका साररूपमें वर्णन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  12.120.20 
सान्त्वयोगमति: प्राज्ञ: कार्याकार्यप्रयोजक:।
निगूढबुद्धेर्धीरस्य वक्तव्ये वा कृतं तथा॥ २०॥
 
 
अनुवाद
राजा में सबको समझाने और तर्क से काम करवाने की बुद्धि होनी चाहिए। विद्वान होने के साथ-साथ उसे लोगों को कर्तव्य पालन की प्रेरणा देनी चाहिए और उन्हें अधर्म की ओर जाने से रोकना चाहिए। अथवा, जिसकी बुद्धि गम्भीर और गंभीर है, उस धैर्यवान पुरुष को उपदेश देने की क्या आवश्यकता है?॥20॥
 
The king should have the wisdom to convince everyone and get the work done through logic. Along with being learned, he should inspire people to do their duty and stop them from going towards the wrong. Or, what is the need to preach to a patient man whose intellect is deep and serious?॥20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)