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mahabharat 12.120.17: इसी प्रकार बुद्धिमान राजा को भी अपने स्थान की रक्षा करने वाले मोर के समान अपने राज्य की अच्छी तरह देखभाल करनी चाहिए और उन्नति करने वाली नीति का पालन करना चाहिए ॥17॥   |   mahabharat अध्याय 12.120: राजधर्मका साररूपमें वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 120: राजधर्मका साररूपमें वर्णन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.120.17 
एवं मयूरवद् राजा स्वराज्यं परिपालयेत्।
आत्मवृद्धिकरीं नीतिं विदधीत विचक्षण:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार बुद्धिमान राजा को भी अपने स्थान की रक्षा करने वाले मोर के समान अपने राज्य की अच्छी तरह देखभाल करनी चाहिए और उन्नति करने वाली नीति का पालन करना चाहिए ॥17॥
 
Similarly, a wise king, like a peacock protecting its place, should take good care of his kingdom and should follow the policy that helps him progress. ॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)