श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 120: राजधर्मका साररूपमें वर्णन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.120.13 
प्रावृषीवासितग्रीवो मज्जेत निशि निर्जने।
मायूरेण गुणेनैव स्त्रीभिश्चालक्षितश्चरेत्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
जैसे मोर आधी रात को एकांत स्थान में छिप जाता है, वैसे ही राजा को भी वर्षा ऋतु में शत्रुओं पर आक्रमण न करके, अदृश्य होकर महल में ही रहना चाहिए। मोर के गुणों को अपनाकर, स्त्रियों की दृष्टि से बचते हुए, विचरण करना चाहिए॥13॥
 
Just as a peacock hides in a secluded place at midnight, similarly the king should not attack his enemies during the rainy season and should stay in the palace in an invisible manner. Adopting the qualities of a peacock, he should move around unnoticed by women.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)