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mahabharat 12.119.6: सभी सेवकों को उनके उचित कार्य में लगाना चाहिए। जो राजा अपने कर्मों का फल चाहता है, उसे अपने सेवकों को ऐसे कार्यों में नहीं लगाना चाहिए जो उनकी योग्यता और प्रतिष्ठा के विरुद्ध हों।   |   mahabharat अध्याय 12.119: सेवकोंको उनके योग्य स्थानपर नियुक्त करने, कुलीन और सत्पुरुषोंका संग्रह करने, कोष बढ़ाने तथा सबकी देखभाल करनेके लिये राजाको प्रेरणा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 119: सेवकोंको उनके योग्य स्थानपर नियुक्त करने, कुलीन और सत्पुरुषोंका संग्रह करने, कोष बढ़ाने तथा सबकी देखभाल करनेके लिये राजाको प्रेरणा  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.119.6 
कर्मस्विहानुरूपेषु न्यस्या भृत्या यथाविधि।
प्रतिलोमं न भृत्यास्ते स्थाप्या: कर्मफलैषिणा॥ ६॥
 
 
अनुवाद
सभी सेवकों को उनके उचित कार्य में लगाना चाहिए। जो राजा अपने कर्मों का फल चाहता है, उसे अपने सेवकों को ऐसे कार्यों में नहीं लगाना चाहिए जो उनकी योग्यता और प्रतिष्ठा के विरुद्ध हों।
 
All servants should be employed in their appropriate work. A king who desires the fruits of his actions should not employ his servants in such works which are contrary to their ability and dignity.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)