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mahabharat 12.119.18: आपके सभी सेवक सदैव परिश्रमी और युद्धकला में निपुण हों। साथ ही, उन्हें घुड़सवारी या घोड़ों को हांकने में भी विशेष निपुण होना चाहिए॥18॥   |   mahabharat अध्याय 12.119: सेवकोंको उनके योग्य स्थानपर नियुक्त करने, कुलीन और सत्पुरुषोंका संग्रह करने, कोष बढ़ाने तथा सबकी देखभाल करनेके लिये राजाको प्रेरणा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 119: सेवकोंको उनके योग्य स्थानपर नियुक्त करने, कुलीन और सत्पुरुषोंका संग्रह करने, कोष बढ़ाने तथा सबकी देखभाल करनेके लिये राजाको प्रेरणा  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  12.119.18 
नित्ययुक्ताश्च ते भृत्या भवन्तु रणकोविदा:।
वाजिनां च प्रयोगेषु वैशारद्यमिहेष्यते॥ १८॥
 
 
अनुवाद
आपके सभी सेवक सदैव परिश्रमी और युद्धकला में निपुण हों। साथ ही, उन्हें घुड़सवारी या घोड़ों को हांकने में भी विशेष निपुण होना चाहिए॥18॥
 
All your servants should always be diligent and skilled in the art of war. They should also be especially adept at riding or driving horses.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)