Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.119.17: युधिष्ठिर! तुम्हारा अन्न भंडार सदैव पौष्टिक अन्न से भरा रहे और उसकी रक्षा का भार श्रेष्ठ पुरुषों को सौंपा जाए। तुम सदैव अपने धन की वृद्धि करने वाले बनो। 17॥ | mahabharat अध्याय 12.119: सेवकोंको उनके योग्य स्थानपर नियुक्त करने, कुलीन और सत्पुरुषोंका संग्रह करने, कोष बढ़ाने तथा सबकी देखभाल करनेके लिये राजाको प्रेरणा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कोष्ठागारं च ते नित्यं स्फीतैर्धान्यै: सुसंवृतम्।
सदास्तु सत्सु संन्यस्तं धनधान्यपरो भव॥ १७॥
अनुवाद
युधिष्ठिर! तुम्हारा अन्न भंडार सदैव पौष्टिक अन्न से भरा रहे और उसकी रक्षा का भार श्रेष्ठ पुरुषों को सौंपा जाए। तुम सदैव अपने धन की वृद्धि करने वाले बनो। 17॥
Yudhisthira! Your granary should always be filled with nutritious grains and the responsibility of protecting it should be handed over to the best men. May you always be one who increases your wealth. 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥