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mahabharat 12.119.16: राजाओं को अपने कोष की निरन्तर रक्षा करने का प्रयत्न करना चाहिए, क्योंकि कोष ही उनका मूल है और कोष ही उन्हें आगे बढ़ाता है ॥16॥   |   mahabharat अध्याय 12.119: सेवकोंको उनके योग्य स्थानपर नियुक्त करने, कुलीन और सत्पुरुषोंका संग्रह करने, कोष बढ़ाने तथा सबकी देखभाल करनेके लिये राजाको प्रेरणा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 119: सेवकोंको उनके योग्य स्थानपर नियुक्त करने, कुलीन और सत्पुरुषोंका संग्रह करने, कोष बढ़ाने तथा सबकी देखभाल करनेके लिये राजाको प्रेरणा  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.119.16 
कोशश्च सततं रक्ष्यो यत्नमास्थाय राजभि:।
कोशमूला हि राजान: कोशो वृद्धिकरो भवेत्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
राजाओं को अपने कोष की निरन्तर रक्षा करने का प्रयत्न करना चाहिए, क्योंकि कोष ही उनका मूल है और कोष ही उन्हें आगे बढ़ाता है ॥16॥
 
Kings must make every effort to constantly protect their treasury, because the treasury is their root, and it is the treasury that propels them forward. ॥16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)