Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.119.15: जो मनुष्य अपने स्वामी के कार्य में तत्पर रहते हैं, वे अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए धनुष से छूटे हुए बाण के समान आगे बढ़ते हैं। जो सेवक राजा के हित में लगे रहते हैं, राजा उन्हें मधुर वचन बोलकर प्रोत्साहित करता रहता है॥15॥ | mahabharat अध्याय 12.119: सेवकोंको उनके योग्य स्थानपर नियुक्त करने, कुलीन और सत्पुरुषोंका संग्रह करने, कोष बढ़ाने तथा सबकी देखभाल करनेके लिये राजाको प्रेरणा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
बाणवद्विसृता यान्ति स्वामिकार्यपरा नरा:।
ये भृत्या: पार्थिवहितास्तेषां सान्त्वं प्रयोजयेत्॥ १५॥
अनुवाद
जो मनुष्य अपने स्वामी के कार्य में तत्पर रहते हैं, वे अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए धनुष से छूटे हुए बाण के समान आगे बढ़ते हैं। जो सेवक राजा के हित में लगे रहते हैं, राजा उन्हें मधुर वचन बोलकर प्रोत्साहित करता रहता है॥15॥
Those men who are devoted to the work of their master, move ahead like an arrow shot from a bow to achieve their goal. Those servants who are engaged in the welfare of the king, the king keeps encouraging them by speaking sweet words.॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥