श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 119: सेवकोंको उनके योग्य स्थानपर नियुक्त करने, कुलीन और सत्पुरुषोंका संग्रह करने, कोष बढ़ाने तथा सबकी देखभाल करनेके लिये राजाको प्रेरणा  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.119.11 
सिंहस्य सततं पार्श्वे सिंह एवानुगो भवेत्।
असिंह: सिंहसहित: सिंहवल्लभते फलम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
सिंह को सदैव सिंह ही सेवक रखना चाहिए। सिंह के अतिरिक्त यदि कोई अन्य प्राणी सिंह के साथ रहने लगे, तो वह भी सिंह के समान जीवन का फल भोगने लगता है।॥11॥
 
A lion should always have only lions as his servants. If a creature other than a lion starts living with a lion, then it starts reaping the fruits of its life like the lion.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)