Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.119.10: जो विनम्र, परिश्रमी, शान्त, बुद्धिमान, स्वभाव से ही सद्गुणों से युक्त और अपने-अपने पद पर निन्दनीय न हों, वे ही राजाओं के बाह्य सेवक होने के योग्य होते हैं ॥10॥ | mahabharat अध्याय 12.119: सेवकोंको उनके योग्य स्थानपर नियुक्त करने, कुलीन और सत्पुरुषोंका संग्रह करने, कोष बढ़ाने तथा सबकी देखभाल करनेके लिये राजाको प्रेरणा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न्यग्भूतास्तत्परा: शान्ताश्चौक्षा: प्रकृतिजै: शुभा:।
स्वस्थानानपक्रुष्टा ये ते स्यू राज्ञां बहिश्चरा:॥ १०॥
अनुवाद
जो विनम्र, परिश्रमी, शान्त, बुद्धिमान, स्वभाव से ही सद्गुणों से युक्त और अपने-अपने पद पर निन्दनीय न हों, वे ही राजाओं के बाह्य सेवक होने के योग्य होते हैं ॥10॥
Only those who are humble, hard-working, calm, intelligent, naturally blessed with good qualities and free from criticism in their respective positions are eligible to be the external servants of the kings. 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥