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mahabharat 12.118.d7: जो अपने शत्रुओं की दुर्बलताओं को पहचानता है, अपने मित्रों की सहायता करता है तथा अपने सेवकों के विशेष गुणों को समझता है, वह राज्य के लाभों का भागी बनता है।   |   mahabharat अध्याय 12.118: राजाके सेवक, सचिव तथा सेनापति आदि और राजाके उत्तम गुणोंका वर्णन एवं उनसे लाभ   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.118.d7 
दुर्हृदां छिद्रदर्शी य: सुहृदामुपकारवान्।
विशेषविच्च भृत्यानां स राज्यफलमश्नुते॥ )
 
 
अनुवाद
जो अपने शत्रुओं की दुर्बलताओं को पहचानता है, अपने मित्रों की सहायता करता है तथा अपने सेवकों के विशेष गुणों को समझता है, वह राज्य के लाभों का भागी बनता है।
 
He who finds the weaknesses of his enemies, helps his friends and understands the special qualities of his servants, becomes a sharer in the benefits of the kingdom.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)